Area Committee Tharhi Bhawanipur (Bihar)

AREA COMMITTEE OFFICE THARHI BHAWANIPUR, SUPAUL (BIHAR)

BODY OF THE AREA COMMITTEE 7 POSTS APPROVED IN CHANDIGARH

Aicps Office New Rules Dated:-4-6-2019

Body of the Area Committee:- 7 (Seven)Post area allowed to the  Area Committee Members approved by Head Office as per under rules.

If any AICPS Area Committee I-card Holder, missing/damage, any Renewal, issue your I-Card Charges Rs-1000/-only amount in the DD/ Cheque / NEFT / RTGS, Online Deposit, The Name Of  All India Crime Prevention Society Chd. Punjab National Bank Saving Account No:-3252000100080645,  IFSC Code:-PUNB0325200.

Head Office under Area Committee Allows each post under new joining majority 50% welfare fund Utilize for maintenance, Social work, travelling under new rules.

Allow 7 post i-card holders under new joining majority, 7 post i-card holder if you are agree to the terms and condition. Then Head Office issue forms each i-card holder with your photo, then each post allow welfare fund your own bank account by cheque. Your responsibility any program distribute amount release your Area Committee 7 Post,

By making 10 new life yogdan members, you get 50% from Head office (Rs.-30,000/-) Form Download

By making 10 new field executive members, you get 50% from Head Office Rs.-20,000/- only) Form Download

By making 10 new Yogdan members, you get 50% from Head Office issue Rs.-10,000/- only) Form Download

AICPS I/Card are valid all over India, if any administration refuse to accept your AICPS i-Card, then send a written complain to the Head Office Chandigarh and then our legal department will take action and support Aicps Members valid i-card holder only.

All Over India all I-card issue with golden hologram our i-card under the signature of Mr. Avtar Singh (National Governor & Chief Executive Board of Governors) ALL INDIA CRIME PREVENTION SOCIETY CHD. No one has any authority to prepare and issue i-card.

SAME MATTER SENDING TO OUR HEAD OFFICE CHANDIGARH

Yes I am agree Area Committee i-card holder, then send the E-Mail AICPS Head Office Chandigarh.

I am sending application regarding 50% welfare fund under my new joining by cheque own my bank account,

post …………………,  i-card number…………. State……………., District…………

Date………….,

Bank Account Holder Name……………………………

Bank Name:-………………………………, Account Number:-…………………….., IFSC Code:-…………..Post I-Card Holder Signature…………………………,       

OUR MISSION:-Come Forward for (Donation) and contributors to help us to help other-“VOLUNTEERS REQUIRED”
We Hearty congratulate you as yogdan member on your sincere and noble efforts for making India best country in the world.

All over India increase crime our mission: – TO MAKE INDIA CRIME FREE, PEOPLE-POLICE RELATIONSHIP WITH ADMINISTRATION AND POSSIBLE TO CHALLENGE.  

Approval AICPS Head Office Chandigarh

                                                                                                                         

Signature………………….

AREA COMMITTEE PRESIDENT, WB/DSUP/ABHA/X1425

AREA COMMITTEE VICE PRESIDENT, WB/DSUP/ABHA/X1426

AREA COMMITTEE CHAIRMAN, WB/DSUP/ABHA/X1427

AREA COMMITTEE ORGANIZING SECRETARY, WB/DSUP/ABHA/X1428

AREA COMMITTEE FINANCE SECRETARY, WB/DSUP/ABHA/X1429

AREA COMMITTEE TREASURER, WB/DSUP/ABHA/X1430

AREA COMMITTEE P.R.O., WB/DSUP/ABHA/X1431

 
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बिहार

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बिहार
भारत का राज्य
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भारत के मानचित्र पर बिहार
राजधानी पटना
सबसे बड़ा शहर पटना
जनसंख्या 10,40,99,452+
 – घनत्व 1,106 /किमी²
क्षेत्रफल 94,163 किमी² 
 – ज़िले 38
राजभाषा हिन्दी, उर्दू[1]
गठन 26 जनवरी 1950
सरकार बिहार सरकार
 – राज्यपाल लाल जी टंडन
 – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
 – विधानमण्डल द्विसदनीय
विधान परिषद (75 सीटें)
विधान सभा (243 सीटें)
 – भारतीय संसद राज्य सभा (16 सीटें)
लोक सभा (40 सीटें)
 – उच्च न्यायालय पटना उच्च न्यायालय
डाक सूचक संख्या 80 से 82,
84 और 85
वाहन अक्षर BR
आइएसओ 3166-2 IN-BR
gov.bih.nic.in

बिहार भारत का एक राज्य है। बिहार की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ , जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल के विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे पिछड़े योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है।

सन्दर्भ

लोगों का यह मानना है कि बिहार के लोग या बिहार के स्थायी निवासी बहुत ही मेधावी और मेहनती होते हैं। वह अपने दम पर कोई भी काम करते हैं तथा स्वाभिमानी होते हैं। प्राचीन काल से विश्व का गौरव कहे जाने वाले बिहार में वर्तमान साक्षरता दर बहुत कम है लेकिन परिस्थितियाँ बदल रही है और साक्षरता बढ़ रही है। यहाँ की मिट्टी बहुत उपजाऊ है तथा कृषि यहाँ के लोगों की मुख्य जीविका है।

सन् 1936 और 2000 में ओडिशा और झारखण्ड के अलग हो जाने से बिहार ने कृषि के दम पर और अपने मेधा को लेकर उन्नति की है। आई आई टी और यूपीएससी जैसे कठिन परीक्षा में लगभग हर बार बिहार के प्रतिभागी अव्वल होते हैं। इनकी बढ़ती निष्ठा और गौरवशाली इतिहास बिहार को एक बार फिर से अनोखा और विकसित बनाएगा।

बिहार का एक जिला

किंवदंतियों के अनुसार महर्षि विश्वामित्र का आश्रम बक्सर (बिहार) में स्थित था। रामायण की कथा के अनुसार इसी आश्रम में विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर आए थे।[1]

  • माना जाता है कि राम-लक्ष्मण ने यहीं पर ताड़का, सुबाहु आदि राक्षसों को मारा था।
  • इस स्थान को गंगा, सरयू संगम के निकट बताया गया है-

‘तौ प्रयान्तौ महावीयौ दिव्यां विपथगां नदीम्, दद्दशास्ते ततस्तत्र सरय्वाः संगमे शुभे, तत्रा श्रमं पुण्यमृषीणां भावितात्मनाम्।'[2]

  • यहाँ संगम के निकट गंगा को पार करने के पश्चात् राम तथा लक्ष्मण ने भयानक वन देखा था, जहाँ राक्षसी ताड़का का निवास था। वह वन मलद और कारुष जनपदों के निकट था।
  • विश्वामित्र के आश्रम को ‘सिद्धाश्रम’ भी कहा जाता था।

बक्सर के युद्ध (1764) के परिणामस्वरूप निचले बंगाल का अंतिम रूप से ब्रिटिश अधिग्रहण हो गया। मान्यता है कि एक महान पवित्र स्थल के रूप में पहले इसका मूल नाम ‘वेदगर्भ’ था। कहा जाता है कि वैदिक मंत्रों के बहुत से रचयिता इस नगर में रहते थे। इसका संबंध भगवान राम के प्रारंभिक जीवन से भी जोड़ा जाता है।

इतिहास

बिहार का ऐतिहासिक नाम मगध है। बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक नाम पाटलिपुत्र है।

प्राचीन काल

सारण जिले में गंगा नदी के उत्तरी किनारे पर चिरांद, नवपाषाण युग (लगभग 2500-1345 ईसा पूर्व) से एक पुरातात्विक रिकॉर्ड है। बिहार के क्षेत्र जैसे-मगध, मिथिला और अंगा- धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन भारत के महाकाव्यों में वर्णित हैं।

मिथिला को पहली बार इंडो-आर्यन लोगों ने विदेहा साम्राज्य की स्थापना के बाद प्रतिष्ठा प्राप्त की। देर वैदिक काल (सी। 1100-500 ईसा पूर्व) के दौरान, वीढ़ा दक्षिण एशिया के प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक बन गया, कुरु और पंकला के साथ। वेदहा साम्राज्य के किंग्स जहां जनक कहलाते थे। मिथिला के जनक में से एक की सीता, वाल्मीकि द्वारा लिखी जाने वाली हिंदू महाकाव्य, रामायण में भगवान राम की पत्नी के रूप में वर्णित है। बाद में Videha किंगडम Vajishi शहर में अपनी राजधानी था जो वज्जि समझौता में शामिल हो गया, मिथिला में भी है। वज्जि के पास एक रिपब्लिकन शासन था जहां राजा राजाओं की संख्या से चुने गए थे। जैन धर्म और बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथों में मिली जानकारी के आधार पर, वज्जि को 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से गणराज्य के रूप में स्थापित किया गया था, गौतम बुद्ध के जन्म से पहले 563 ईसा पूर्व में, यह दुनिया का पहला गणतंत्र था।

आधुनिक-पश्चिमी पश्चिमी बिहार के क्षेत्र में मगध 1000 वर्षों के लिए भारत में शक्ति, शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बने। 684 ईसा पूर्व में स्थापित हरयंक वंश, राजगढ़ (आधुनिक राजगीर) के शहर से मगध पर शासन किया। इस वंश के दो प्रसिद्ध राजाएं बिंबिसार और उनके बेटे अजातशत्रु थे, जिन्होंने अपने पिता को सिंहासन पर चढ़ने के लिए कैद कर दिया था। अजातशत्रु ने पाटलिपुत्र शहर की स्थापना की जो बाद में मगध की राजधानी बन गई। उन्होंने युद्ध की घोषणा की और बाजी को जीत लिया। हिरुआँ वंश के बाद शिशुनाग वंश का पीछा किया गया था। बाद में नंद वंश ने बंगाल से पंजाब तक फैले विशाल साम्राज्य पर शासन किया।

भारत की पहली साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य द्वारा नंद वंश को बदल दिया गया था। मौर्य साम्राज्य और बौद्ध धर्म का इस क्षेत्र में उभार रहा है जो अब आधुनिक बिहार को बना देता है। 325 ईसा पूर्व में मगध से उत्पन्न मौर्य साम्राज्य, चंद्रगुप्त मौर्य ने स्थापित किया था, जो मगध में पैदा हुआ था। इसकी पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) में इसकी राजधानी थी। मौर्य सम्राट, अशोक, जो पाटलीपुत्र (पटना) में पैदा हुए थे, को दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा शासक माना जाता है।

240 ए। में मगध में उत्पन्न गुप्त साम्राज्य को विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान, वाणिज्य, धर्म और भारतीय दर्शन में भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है। 11 वीं शताब्दी में चोल वंश के राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा बिहार और बंगाल पर आक्रमण किया गया था।

मध्यकाल

मगध में बौद्ध धर्म मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी के आक्रमण की वजह से गिरावट में पड़ गया, जिसके दौरान कई विहार और नालंदा और विक्रमशिला के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया गया। यह दावा किया गया कि 12 वीं शताब्दी के दौरान हजारों बौद्ध भिक्षुओं की हत्या हुई थी। डी.एन. झा सुझाव देते हैं, इसके बजाय, ये घटनाएं सर्वोच्चता के लिए लड़ाई में बौद्ध ब्राह्मण की झड़पों का परिणाम थीं। 1540 में, महान पस्तीस के मुखिया, सासाराम के शेर शाह सूरी, सम्राट हुमायूं की मुगल सेना को हराकर मुगलों से उत्तरी भारत ले गए थे। शेर शाह ने अपनी राजधानी दिल्ली की घोषणा की

11 वीं शताब्दी से लेकर 20 वीं शताब्दी तक, मिथिला पर विभिन्न स्वदेशीय राजवंशों ने शासन किया था। इनमें से पहला, जहां कर्नाट, अनवर राजवंश, रघुवंशी और अंततः राज दरभंगा के बाद। इस अवधि के दौरान मिथिला की राजधानी दरभंगा में स्थानांतरित की गई थी।

आधुनिक काल

1857 के प्रथम सिपाही विद्रोह में बिहार के बाबू कुंवर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1905 में बंगाल का विभाजन के फलस्वरूप बिहार नाम का राज्य अस्तित्व में आया। 1936 में उड़ीसा इससे अलग कर दिया गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार के चंपारण के विद्रोह को, अंग्रेजों के खिलाफ बग़ावत फैलाने में अग्रगण्य घटनाओं में से एक गिना जाता है। स्वतंत्रता के बाद बिहार का एक और विभाजन हुआ और 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य इससे अलग कर दिया गया। भारत छोड़ो आंदोलन में भी बिहार की गहन भूमिका रही।
देखें भारत छोड़ो आन्दोलन और बिहार

भौगोलिक स्थिति

 
बिहार का उपग्रह द्वारा लिया गया चित्र

उत्तर भारत में 21°58’10” ~ 27°31’15” उत्तरी अक्षांश तथा 82°19’50” ~ 88°17’40” पूर्वी देशांतर के बीच बिहार एक हिंदी भाषी राज्य है। राज्य का कुल क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है जिसमें 92,257.51 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण क्षेत्र है। झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार की भूमि मुख्यतः नदियों के मैदान एवं कृषियोग्य समतल भूभाग है। गंगा के पूर्वी मैदान में स्थित इस राज्य की औसत ऊँचाई १७३ फीट है। भौगोलिक तौर पर बिहार को तीन प्राकृतिक विभागो में बाँटा जाता है- उत्तर का पर्वतीय एवं तराई भाग, मध्य का विशाल मैदान तथा दक्षिण का पहाड़ी किनारा
उत्तर का पर्वतीय प्रदेश सोमेश्वर श्रेणी का हिस्सा है। इस श्रेणी की औसत उचाई 455 मीटर है परन्तु इसका सर्वोच्च शिखर 874 मीटर उँचा है। सोमेश्वर श्रेणी के दक्षिण में तराई क्षेत्र है। यह दलदली क्षेत्र है जहाँ साल वॄक्ष के घने जंगल हैं। इन जंगलों में प्रदेश का इकलौता बाघ अभयारण्य वाल्मिकीनगर में स्थित है।
मध्यवर्ती विशाल मैदान बिहार के 95% भाग को समेटे हुए हैं। भौगोलिक तौर पर इसे चार भागों में बाँटा जा सकता है:- 1- तराई क्षेत्र यह सोमेश्वर श्रेणी के तराई में लगभग 10 किलोमीटर चौ़ड़ा कंकर-बालू का निक्षेप है। इसके दक्षिण में तराई उपक्षेत्र है जो प्रायः दलदली है।
2-भांगर क्षेत्र यह पुराना जलोढ़ क्षेत्र है। समान्यतः यह आस पास के क्षेत्रों से 7-8 मीटर ऊँचा रहता है।
3-खादर क्षेत्र इसका विस्तार गंडक से कोसी नदी के क्षेत्र तक सारे उत्तरी बिहार में है। प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ के कारण यह क्षेत्र बहुत उपजाऊ है। परन्तु इसी बाढ़ के कारण यह क्षेत्र तबाही के कगार पर खड़ा है।

गंगा नदी राज्य के लगभग बीचों-बीच बहती है। उत्तरी बिहार बागमती, कोशी, बूढी गंडक, गंडक, घाघरा और उनकी सहायक नदियों का समतल मैदान है। सोन, पुनपुन, फल्गू तथा किऊल नदी बिहार में दक्षिण से गंगा में मिलनेवाली सहायक नदियाँ है। बिहार के दक्षिण भाग में छोटानागपुर का पठार, जिसका अधिकांश हिस्सा अब झारखंड है, तथा उत्तर में हिमालय पर्वत की नेपाल श्रेणी है। हिमालय से उतरने वाली कई नदियाँ तथा जलधाराएँ बिहार होकर प्रवाहित होती है और गंगा में विसर्जित होती हैं। वर्षा के दिनों में इन नदियों में बाढ़ एक बड़ी समस्या है।

राज्य का औसत तापमान गृष्म ऋतु में 35-45 डिग्री सेल्सियस तथा जाड़े में 5-15 डिग्री सेल्सियस रहता है। जाड़े का मौसम नवंबर से मध्य फरवरी तक रहता है। अप्रैल में गृष्म ऋतु का आरंभ होता है जो जुलाई के मध्य तक रहता है। जुलाई-अगस्त में वर्षा ऋतु का आगमन होता है जिसका अवसान अक्टूबर में होने के साथ ही ऋतु चक्र पूरा हो जाता है। औसतन 1205 मिलीमीटर वर्षा का का वार्षिक वितरण लगभग 52 दिनों तक रहता है जिसका अधिकांश भाग मानसून से होनेवाला वर्षण है।

उत्तर में भूमि प्रायः सर्वत्र उपजाऊ एवं कृषियोग्य है। धान, गेंहूँ, दलहन, मक्का, तिलहन, तम्बाकू,सब्जी तथा केला, आम और लीची जैसे कुछ फलों की खेती की जाती है। हाजीपुर का केला एवं मुजफ्फरपुर की लीची बहुत प्रसिद्ध है।

भाषा और संस्कृति

हिंदी, अंगिका, भोजपुरी, मगही, उर्दू और मैथिली यहाँ की प्रमुख भाषायें हैं।

बिहार की संस्कृति मगध, अंग, मिथिला तथा वज्जी संस्कृतियों का मिश्रण है। नगरों तथा गाँवों की संस्कृति में अधिक फर्क नहीं है। नगरों में भी लोग पारंपरिक रीति रिवाजों का पालन करते है तथा उनकी मान्यताएँ रुढिवादी है। समाज पुरूष प्रधान है। प्रमुख पर्वों में छठ, होली, दीपावली, दशहरा, महाशिवरात्रि, नागपंचमी, श्री पंचमी, मुहर्रम, ईद तथा क्रिसमस हैं। सिक्खों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म स्थान होने के कारण पटना में उनकी जयन्ती पर भी भारी श्रद्धार्पण देखने को मिलता है।

जातिवाद

जातिवाद बिहार की राजनीति तथा आमजीवन का अभिन्न अंग रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इसका विराट रूप सामने आया था। वर्तमान में काफी हद तक यह भेदभाव कम हो गया है। इस जातिवाद के दौर की एक ख़ास देन है – अपना उपनाम बदलना। जातिवाद के दौर में कई लोगों ने जाति स्पष्ट न हो इसके लिए अपने तथा बच्चों के उपनाम बदल कर एक संस्कृत नाम रखना आरंभ कर दिया। इसके फलस्वरूप कई लोगों का वास्तविक उपनाम यादव, शर्मा, मिश्र, वर्मा, झा, सिन्हा, श्रीवास्तव, राय इत्यादि से बदलकर प्रकाश, सुमन, प्रभाकर, रंजन, भारती इत्यादि हो गया। जातिसूचक उपनाम के बदले कई लोग ‘कुमार’ लिखना पसंद करते हैं।

मनोरंजन

बिहार के शहर, कस्बों तथा गाँवों में फिल्मों की लोकप्रियता बहुत अधिक है। हिंदी फिल्मों के संगीत बहुत पसन्द किये जाते हैं। मुख्य धारा की हिन्दी फिल्मों के अलावा मैथिली, भोजपुरी फिल्मों ने भी अपना प्रभुत्व जमाया है। मैथिली तथा अन्य स्थानीय सिनेमा भी लोकप्रिय हैं। अंग्रेजी फिल्म पटना जैसे नगरों में ही देखा जाता है। उच्चस्तरीय पसंद वाले लोग नृत्य, नाटकीय मंचन या चित्रकला में अपना योगदान देना पसंद करते हैं।

शादी-विवाह

शादी विवाह के दौरान ही प्रदेश की सांस्कृतिक प्रचुरता स्पष्ट होती है। जातिगत आग्रह के कारण शत-प्रतिशत शादियाँ माता-पिता या रिश्तेदारों द्वारा तय परिवार में ही होता है। शादी में बारात तथा जश्न की सीमा समुदाय तथा उनकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है। लोकगीतों के गायन का प्रचलन लगभग सभी समुदाय में हैं। आधुनिक तथा पुराने फिल्म संगीत भी इन समारोहों में सुनाई देते हैं। शादी के दौरान शहनाई का बजना आम बात है। इस वाद्ययंत्र को लोकप्रिय बनाने में बिस्मिल्ला खान का नाम सर्वोपरि है, उनका जन्म बिहार में ही हुआ था।

खानपान

बिहार अपने खानपान की विविधता के लिए प्रसिद्ध है। शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनो व्यंजन पसंद किये जाते हैं। मिठाईयों की विभिन्न किस्मों के अतिरिक्त अनरसा की गोली, खाजा, मोतीचूर का लड्डू, तिलकुट यहाँ की खास पसंद है। सत्तू, चूड़ा-दही और लिट्टी-चोखा जैसे स्थानीय व्यंजन तो यहाँ के लोगों की कमजोरी हैं। लहसुन की चटनी भी बहुत पसंद करते हैं। लालू प्रसाद के रेल मंत्री बनने के बाद तो लिट्टी-चोखा भारतीय रेल के महत्वपूर्ण स्टेशनों पर भी मिलने लगा है। सुबह के नास्ते में चूड़ा-दही या पूरी-जलेबी खूब खाये जाते हैं। चावल-दाल-सब्जी और रोटी बिहार का सामान्य भोजन है।

खेलकूद

भारत के अन्य कई जगहों की तरह क्रिकेट यहाँ भी सर्वाधिक लोकप्रिय है। इसके अलावा फुटबॉल, हाकी, टेनिस और गोल्फ भी पसन्द किया जाता है। बिहार का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण होने के कारण पारंपरिक भारतीय खेल जैसे कबड्डी कुश्तीबहुत लोकप्रिय हैं।

उद्योग

राज्‍य के मुख्‍य उद्योग हैं –

November 23, 2015 Post Under - Read More

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